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Category Archives: Poetry

Jeevan ki vo baaten – जीवन कि वो बातें


क्या पता है तुमको,
कि दुनिया में सबसे ज्यादा,
दर्द क्या देता है ।

वो अनकही सी बातें,
जो इंसान दिल में दबा रखता है ।
अगर केह दिया होता उन लवजून को,
तो शायद ये डगर सुहानी हो जाती ।
पर न कहा हमने,
न जाने क्यूँ ।

शायद ये गुरूर था,
या फिर था डर ।
कुछ खोने का,
या खुद झुकने का ।

उन शब्दों को दबा के रखा है,
जो संजोये थे किसी और के लिए ।
कुछ उस दिलबर के लिये,
तो कुछ उस दोस्त के लिये,
कुछ थे अपने लाडले के लिये,
और कुछ थे परिवार के लिए ।

क्यों ना आज,
वो बातें हम बोल दें ।
अपने उन रिश्तों में ,
फिर से नया रस घोल दें।
वो क्षमा, वो इकरार,
वो दोस्ती का इज़हार,
वो ममता, वो प्यार ।

क्यूँ ना आज सब कुछ,
हाँ सब कुछ उड़ेल दे ।

और भर ले इस दिल को,
कुछ खुशनुमा लम्हों से ।
हाँ जी ले ये ज़िन्दगी,
इन नयी उमंगों में ।

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Haha – Vo Parchhaiyan: हाहा – वो परछाईयां


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परछाइयों का पीछा करते करते,
मैं भूल गया था के वो लोग कौन थे,
भूल गया की कब धुप थी ,
और कब थी छान्व।

भागता रहा मैं बस अपनी मर्ज़ी से,
पता नहीं किस डगर पर,
जब पैर थामे तो ये था पाया ,
की जो मैं चाहता था पकड़ना ,
वो था मेरा अपना साया।

आज देखता हूँ बीते उस पल को,
तो भीनी सी मुस्कान है चेहरे पे आति,
की उस दौड़ में भी एक मस्ती थी,
एक आराम देने लायक थकान थी।

आगे कुछ और है रस्ते,
और दूर कुछ और हैं परछाईयां ,
पर इस बार थोडा दूर चल लूं ,
कुछ आहिस्ता लम्हे गुज़ार लॊन,
और हसीं इस सफ़र को,
मैं थोडा और संवार लूं ।

Kuchh pal aise bhi – कुछ पल ऐसे भी


कुछ पल ऐसे भी ,
जो जाने कैसे वापस आ जाते हैं,
कुछ गानों के लव्जों में ,
कुछ तराने दिल को छु जाते हैं .

कभी अकेले मे, तो कभी किसी भीड़ मे,
कभी किसी डगर पर चलते हुए,
कभी याद आते हैं ,
जब दिखे कोई मुस्कुराते हुए.

वो हसीं यादें बस ऐसे वापस आती हैं,
मानो जैसे कल ही की वो बातें हैं,
कुछ चेहरे हैं ,
कुछ किस्से हैं,
उन किस्सों मे,
कुछ हिस्से हैं,
और साथ ही उनके कुछ ,
कुछ खुशियाँ थीं ,
कुछ याराना था .

ये कविता है जो जिंदगी ,
हर रोज़ एक पंक्ति लिखवाती है,
कुछ सपने दिखाती है,
कुछ बातें बनती है,
कभी कभी, जाने अनजाने मे,
कुछ नयी कवितायेँ भी लिखवाती है,
हर बार बस येही खेल खिलाती है,
और बस युहीं हर रोज़,
एक नयी पंक्ति लिखती चली जाती है.

A cheesy tribute


Nikky Shivangi Pasta

Nikky Shivangi Pasta

There is cheese in my tummy,
It tasted very yummy.

A salt grain here,
Some capsicum pieces there.

Smeared in milk,
Its soft as silk.

I had three plates full,
For which I am very grateful.

But its not just about the cheese,
Or the milk,
Or the whole dish feeling like silk.

Its about the memories,
Of friendship, which were once weaved,
Delicate and royal,
With colorful threads interleaved.

Its about the flavours,
I tasted in my life,
With friends I savor,
And always ready to high five.

The taste is distinct and many years old,
And brings back memories,
Of words said and told.

A recipie invented by two ladies,
And now served to me by just one,
Such was their partnership,
Like which I have found none.

So, here is a small tribute,
I would like to share,
To cheese dinners and corny talks,
And a huge applause to my foodie entrepreneurs =D

Sach ka saamna


Mooh pher lene se hakikat badal nahi jaati.
Dil tod ke chale jane se halat sanwar nahi jaati.

Tumne jaane se pehle na poocha ki ye gham kabhi mit payega.
Beeta hua kal un sunehre lamho ke saath kya fir wapas aayega.

Ek patthar to tabiyat se uchhalo mere yaar
Kal hi kyun, tumhara aaj aur kal nikhra hua nazar aayega.

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